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मेथी के औषधीय प्रयोग

आयुर्वेद के अनुसार डाइबिटीज व मधुमेह में मेथी का सेवन बहुत लाभदायक माना गया है। मेथी को भारतभर में आमतौर पर सेवन किया जाता है। यदि मेथी की सब्जी लोहे की कढ़ाही में बनायी गई तो इसमें लौह तत्व ज्यादा बढ़ जाती है। एनीमिया यानी खून की कमी के रोगियों को यह बहुत फायदेमंद है।

किसी भी व्यक्ति की कैल्सियम की दिनभर की जरूरत 400 मि. ग्राम कैल्सियम मिल जाता है। विटामिन ए और सी भी मेथी में खूब रहता है। ये दोनों विटामिन मेथी दानों की तुलना में मेथी की सब्जी में ज्यादा होते है। साधारण मेथी चम्पा व कसूरी मेथी। मेथी व मेथी दाना डाइबिटीज रोगियों के लिए बहुत अधिक लाभदायक है।

ककड़ी के औषधीय प्रयोग

- सब्जी के रूप में इस्तेमाल करने पर पथरी होने की संभावना नहीं रहती. गर्मियों में ठंडक देती है .
- छौंक लगाना यानी संस्कृत में संस्कारित करना है . यह एक वैज्ञानिक पद्धति है जिससे उसके गुण बढ़ते है और दोष कम होते हैं . इसलिए इतना मसाला भी नहीं डालना चाहिए की इसके मूल गुण समाप्त हो जाए .
- इसकी सब्जी पेट की समस्याओं में लाभदायक हैं
- जब खाना हो तुरंत काट कर खाए. ज़्यादा देर काट के रखा हुआ सलाद खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं .

खस घास के औषधीय प्रयोग

भारत में उगनेवाली इस घास की ओर दुनिया का ध्‍यान 1987 में विश्‍वबैंक के दो कृषि वैज्ञानिकों के जरिए गया। इसकी काफी रोचक कहानी है। विश्‍वबैंक के कृषि वैज्ञानिक रिचर्ड ग्रिमशॉ और जॉन ग्रीनफिल्‍ड मृदा क्षरण ( Soil erosion ) पर रोक के उपाय की तल
ाश में थे। इसी दौरान उनका भारत में आना हुआ और उन्‍होंने कर्नाटक के एक गांव में देखा कि वहां के किसान सदियों से मृदा क्षरण पर नियंत्रण के लिए वेटीवर उगाते आए हैं। उन्‍होंने किसानों से ही जाना कि इसकी वजह से उनके गांवों में जल संरक्षण भी होता था तथा कुओं को जलस्‍तर ऊपर बना रहता था।
उसके बाद से विश्‍वबैंक के प्रयासों से दुनिया भर में वेटीवर को पर्यावरण संरक्षण के उपयोगी साधन के रूप में काफी लोकप्रियता मिली है। हालांकि भारतीय कृषि व पर्यावरण विभागों व इनसे संबद्ध वैज्ञानिकों ने इसमें खासी रुचि नहीं दिखायी। नतीजा यह है कि भारत में लोकप्रियता की बात तो दूर, इस पौधे का चलन कम होने लगा है।आप भले एयरकंडीशंड घरों में रहते हों, लेकिन गर्मियों में खस की टट्टियों की याद जरूर आती होगी। इस बात को अधिक से अधिक लोगों को जानने की जरूरत है कि इस वनस्‍पति की उपयोगिता आपके कमरों के तापमान को नियंत्रित रखने में ही नहीं, पर्यावरण को अनुकूलित रखने में भी है

इस घास की ऊपर की पत्तियों को काट दिया जाता है और नीचे की जड़ से खस के परदे तैयार किए जाते हैं। बताते हैं कि इसके करीब 75 प्रभेद हैं, जिनमें भारत में वेटीवेरिया जाईजेनियोडीज (Vetiveria zizanioides) अधिक उगाया जाता है।

बुखार हो तो इसकी जड़ का काढ़ा पीयें . उसमें गिलोय और तुलसी मिला लें तो और भी अच्छा रहेगा . हल्का बुखार हो या रह रह कर बुखार आये , बुखार टूट न रहा हो तो यह काढ़ा बहुत लाभदायक रहता है .

पित्त , एसिडिटी या घबराहट हो तो इसकी जड़ कूटकर काढ़ा बनाएं और मिश्री मिलाकर पीयें . चर्म रोग या एक्जीमा या एलर्जी हो तो इसकी 3-4 ग्राम जड़ में 2-3 ग्राम नीम मिलाकर काढ़ा बनाएं और सवेरे शाम पीयें .

दिल संबंधी कोई परेशानी हो तो इसकी जड़ में मुनक्का मिलाकर काढ़ा बनाकर मसलकर छानकर पीयें .इससे होरमोंस भी ठीक रहेंगे और धड़कन की गति भी ठीक रहेगी . किडनी की परेशानी में खस और गिलोय का काढ़ा सवेरे सवेरे पीयें . हाय बी. पी . हो या एंजाइना की समस्या हो तो इसकी जड़ और अर्जुन की छाल का काढ़ा पीयें .

प्यास बहुत अधिक लगती हो तो इसकी जड़ कूटकर पानी में ड़ाल दें . बाद में छानकर पानी पी लें . यह शीतल अवश्य है ; परन्तु इसे लेने से जोड़ों का दर्द बढ़ता नहीं है .

खस का इस्‍तेमाल सिर्फ ठंडक के लिए ही नहीं होता, आयुर्वेद जैसी परंपरागत चिकित्‍सा प्रणालियों में औषधि के रूप में भी इसका इस्‍तेमाल होता है। इसके अलावा इससे तेल बनता है और इत्र जैसी खुशबूदार चीजों में भी इसका उपयोग होता है।

खस का अत्तर.

इसका एक तोला आप 25 रुपये से 1000 रुपये तक का खरीद सकते हैं. इसे भी शरीर पर सुबह लगाने पर शाम तक लोग पूछते रहते हैं कि यह भीनी भीनी सुगंध कहां से आ रही है. दो तोला खस साल भर काम आ जाता है.

खस का अत्तर लगाने वालो को सकून देता है, मानसिक तौर पर ठंडाई की अनुभूति देता है, और मन को स्वस्थ रखता है. इसके मनोवैज्ञानिक कारण हैं, लेकिन औषधि स्तर पर भी कई कारक हैं. अफसोस यह है कि कद्रदानों के अभाव में खास का अत्तर लगभग लुप्त सा हो गया है.

अच्छे किस्म का अत्तर खस के अच्छे गुणों वाले जडों से बनाया जाता है और उसको हलके चंदन या गुलाब के अत्तर का पुट दिया जाता है. इससे अत्तर का तीखापन कम होकर भीना भीना सा गंध देने लगता है. अत्तर अच्छी किस्म का हो तो आप के आसपास के लोगों को यह महक दिन भर मिलती रहेगी जबको आप को अगले स्नान के समय तक यह महक मिलती रहेगी.

उम्दा किस्म का अत्तर खरीदें और प्रयोग करें. बस स्नान करने के बाद बहुत ही हल्के से अपने छाती, गर्दन, और हाथों पर लगा लें. अत्तर की कम से कम मात्रा का प्रयोग पर्याप्त रहता है.

अनार का जूस

* रोज एक गिलास अनार का जूस पीजिए। अनार का रस पेट पर जमी चर्बी तथा कमर पर टायर की तरह लटकते मांस को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
* अपच : यदि आपको देर रात की पार्टी से अपच हो गया है तो पके अनार का रस चम्मच, आधा चम्मच सेका हुआ जीरा पीसकर तथा गुड़ मिलाकर दिन में तीन बार लें।
* प्लीहा और यकृत की कमजोरी तथा पेटदर्द अनार खाने से ठीक हो जाते हैं।
* दस्त तथा पेचिश में : 15 ग्राम अनार के सूखे छिलके और दो लौंग लें। दोनों को एक गिलास पानी में उबालें। फिर पानी आधा रह जाए तो दिन में तीन बार लें। इससे दस्त तथा पेचिश में आराम होता है।
* अनार कब्ज दूर करता है, मीठा होने पर पाचन शक्ति बढ़ाता है। इसका शर्बत एसिडिटी को दूर करता है।
* अत्यधिक मासिक स्राव में : अनार के सूखे छिलकों का चूर्ण एक चम्मच फाँकी सुबह-शाम पानी के साथ लेने से रक्त स्राव रुक जाता है।
* मुँह में दुर्गंध : मुँह में दुर्गंध आती हो तो अनार का छिलका उबालकर सुबह-शाम कुल्ला करें। इसके छिलकों को जलाकर मंजन करने से दाँत के रोग दूर होते हैं।
* अनार आपका मूड अच्छा करता है और साथ ही याददाश्त बढ़ाता है। तनाव से भी आपको निजात दिलाता है।

* अनार का रस वृद्धावस्था में सठिया जाने के रोग की संभावना भी घटाता है।
* अनार में लोहा की भरपूर मात्रा होती है, जो रक्त में आयरन की कमी को पूरा करता है।
* अनार के जूस को खाली पेट मे पी सकते है और यह सफेद दाग मे यह फायदा करता है
* उच्च रक्तचाप को घटाता है, सूजन और जलन में राहत पहुँचाता है, गठिया और वात रोग की संभावना घटाता और जोड़ों में दर्द कम करता है, कैंसर की रोकथाम में सहायक बनता है, शरीर के बुढ़ाने की गति धीमी करता है और महिलाओं में मातृत्व की संभावना और पुरुषों में पुरुषत्व बढ़ाता है। अनार को त्वचा के कैंसर, स्तन-कैंसर, प्रोस्टेट ग्रंथि के कैंसर और पेट में अल्सर की संभावना घटाने की दृष्टि से भी विशेष उपयोगी पाया गया है।
* बच्चों की खाँसी, अनार के छिलकों का चूर्ण आधा-आधा छोटा चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम चटाने से मिट जाती है।
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हानिकारक
सभी प्रकार के अनार शीत प्रकृति वालों के लिये हानिकारक होता है। मीठा अनार बुखार वालों को खट्टा और फीका अनार सर्द मिजाज वालों के लिए हानिकारक हो सकता है।